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वाराणसी रोपवे परियोजना – बनारस का नया आसमान से सफर

वाराणसी रोपवे परियोजना – बनारस का नया आसमान से सफर

प्रकाशित: 07 Oct 2025, 05:57 AM

वाराणसी रोपवे परियोजना – बनारस का नया आसमान से सफर
✍️ लेखक – राजू चित्रा, खबर हरियाणा

भारत के धार्मिक और सांस्कृतिक शहर वाराणसी (काशी) में विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया जा रहा है। यहाँ बन रही भारत की पहली अर्बन पब्लिक ट्रांसपोर्ट रोपवे परियोजना आने वाले समय में शहर की पहचान को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में यह परियोजना न केवल तकनीकी दृष्टि से अद्भुत है बल्कि पर्यावरण और यातायात दोनों के लिए एक वरदान साबित होने जा रही है।

इस वाराणसी रोपवे परियोजना का शिलान्यास 24 मार्च 2023 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। इसकी कुल लंबाई लगभग 3.75 किलोमीटर है, जो वाराणसी कैंट स्टेशन से शुरू होकर विद्या पीठ, रथयात्रा, गिरजा घर होते हुए गोदौलिया चौक तक जाएगी। इस मार्ग पर कुल पाँच स्टेशन बनाए जा रहे हैं, जिनमें से चार यात्रियों के लिए और एक तकनीकी स्टेशन होगा।

परियोजना की कुल लागत लगभग ₹807 करोड़ आंकी गई है और इसे हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल (HAM) पर तैयार किया जा रहा है। इसमें निर्माण की लागत का 60 प्रतिशत निर्माण अवधि में और शेष 40 प्रतिशत संचालन व रखरखाव अवधि में दिया जाएगा। इस काम को पूरा करने का जिम्मा भारत की अग्रणी कंपनी बार्थर इंडस्ट्रीज लिमिटेड को सौंपा गया है, जबकि विदेशी फंडिंग में एक स्विस कंपनी Xport Finance ने भी ₹322 करोड़ का निवेश किया है।

वाराणसी की सँकरी गलियाँ, धार्मिक भीड़ और भारी ट्रैफिक लंबे समय से यहाँ की सबसे बड़ी समस्या रहे हैं। कैंट स्टेशन से गोदौलिया तक की दूरी, जो सड़क मार्ग से 45 मिनट से लेकर एक घंटे तक लगती थी, अब रोपवे से सिर्फ 15 मिनट में पूरी की जा सकेगी। इस रोपवे में लगभग 150 गोंडोला (केबिन) होंगे, जिनमें हर एक में 10 यात्री बैठ सकेंगे। प्रतिदिन करीब 90,000 यात्री इसका उपयोग कर सकेंगे, जिससे शहर की सड़कों पर वाहनों का दबाव काफी कम होगा।

हालांकि निर्माण कार्य के दौरान कुछ तकनीकी चुनौतियाँ भी सामने आईं — जैसे घोड़ानाला क्षेत्र में टावर नींव के दौरान मिट्टी धँसने की समस्या और बरसात के मौसम में रुकावटें। इसके बावजूद इंजीनियरों और प्रशासन की टीम लगातार मेहनत कर रही है ताकि परियोजना तय समय पर पूरी हो सके।

इस परियोजना के पूरा होने के बाद वाराणसी देश का पहला ऐसा शहर बन जाएगा, जहाँ सार्वजनिक परिवहन के रूप में रोपवे प्रणाली का उपयोग होगा। यह शहर के ट्रैफिक को राहत देने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और आधुनिकता का प्रतीक बनेगा।

वाराणसी के लोग अब सचमुच कह सकेंगे —
“काशी अब सिर्फ धरती पर नहीं, आसमान से भी चलेगी!”

यह परियोजना न सिर्फ प्रधानमंत्री मोदी के “नए भारत” के विज़न का हिस्सा है, बल्कि यह दिखाती है कि कैसे पुरातनता और आधुनिकता का संगम भारत की धरती पर एक साथ संभव है।

✍️ – राजू चित्रा, खबर हरियाणा टीम