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तीज केवल पर्व नहीं, हमारी संस्कृति के भी प्रतीक: श्रुति चौधरी

तीज केवल पर्व नहीं, हमारी संस्कृति के भी प्रतीक: श्रुति चौधरी

प्रकाशित: 28 Jul 2025, 07:19 PM

-कभी हरियाणा की पहचान बनी थी गिरत लिंगानुपात और लड़की को बोझ समझने वाली मानसिकता से, लेकिन आज हरियाणा बदल रहा है। यह बदलाव अचानक नहीं आया, यह है सरकार की नीति, नीयत और जमीनी स्तर पर काम कर रही हर आंगनबाउी कार्यकर्ता, आशा बहन और सखी की तपस्या का फल: श्रुति चौधरी
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ मौजूद मंत्री श्रुति चौधरी।
राजू चित्रा खबर हरियाणा
तीज पर्व पर अंबाला में आयोति कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग की मंत्री श्रुति चौाधरी ने कहा कि वह तीज के पावन अवसर पर प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का मंच पर विराजमान सभी माननीयों, हमारी आशा, आंगनबाड़ी और एएनएम बहनों, अधिकारियों और विशेष रूप से आज यहां पधारी हर मां, बहन और बेटी का वह हृदय से स्वागत करती हैं। बता दें कि यह कार्यक्रम वर्चुअली प्रदेश के सभी जिलों में भी प्रसारित किया गया।
श्रुति चौधरी ने कहा कि तीज केवल पर्व नहीं, बल्कि यह हमारी संस्कृति का भी प्रतीक है और आज जब हम यह पर्व मना रहे हैं, हम यह भी प्रण लेते हैं कि हर बेटी को सम्मान, हर मां को सुरक्षा और हर बच्चे को अवसर देना हमारी प्राथमिकता रहेगी।
मंत्री श्रुति चौधरी ने कहा कि बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान से बहुत सुधार हुआ है और भी कदम इसके सुधार के लिए लगातार उठाए जा रहे हैं। कभी हरियाणा की पहचान बनी थी गिरती लिंगानुपात और लड़की को बोझ समझने वाली मानसिकता से, लेकिन आज हरियाणा बदल रहा है और दुनिया देख रही है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2015 में जन्म के समय लिंगानुपात था मात्र 871 बेटियां प्रति एक हजार लड़के। आज वही संख्या 904 के पार पहुंच चुकी है। हमारी बेटियां अब यूपीएससी पास कर रही हैं, लड़ाकू विमान उड़ा रही हैं और पुलिस अफसर बनकर रही हैं और अंतरराष्ट्रीय पदक ला रही हैं। यह बदलाव अचानक नहीं आया है। यह सरकार की नीति, नीयत और जमीनी स्तर पर काम कर रही हर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा बहन और सखी की तपस्या का फल है। उन्होंने कहा कि हम जानते हैं कि शिशु के जीवन के पहले 1000 दिन उसके पूरे भविष्य की नींव रखते हैं। इसलिए बाल विकास सेवा योजना केवल एक योजना नहीं, यह एक जीवनरेखा है। हरियाणा में 25000 से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से हम प्रदान कर रहे हैं, पूरक पोषण ताकि कोई बच्चा कुपोषित न रहे। रोगों से सुरक्षा के लिए टीकाकरण किया जा रहा है। स्वास्थ्य जांच एवं रेफरल के साथ ही समय पर उपचार दिया जा रहा है। प्राथमिक शिक्षा से पूर्व की पढ़ाई से बच्चों की नींव मजबूत की जा रही है। पोषण एवं स्वास्थ्य शिक्षा दी जा रही है, जिससे माताएं जागरूक बनें। आईसीडीएस वह गोद है, जहां से भारत के उज्ज्वल भविष्य की शुरूआत होती है। उन्होंने बताया कि प्ले स्कूल और क्रेच के माध्यम से मां की चिंता का समाधान और बच्चे का उज्ज्वल भविष्य इसी स्कीम द्वारा दिए जा रहे हैं। प्ले स्कूलों में आज 50908 से अधिक बच्चे रजिस्टर्ड हैं। क्रेचों में दस हजार से अधिक बच्चों को सुरक्षित, पोषित और देखरेख युक्त वातावरण मिल रहा है। इन बच्चों के लिए जो तीन से छह वर्ष के हैं और स्कूल जाने से पहले की शिक्षा और सामाजिकता सीख रहे हैं, उन नवजात और छोटे बच्चों के लिए जिनकी माएं खेतों, फैक्ट्रियों, दुकानों में काम करती हैं, अब वे बिना चिंता के काम कर सकती हैं। इन प्ले स्कूलों में बच्चे अब केवल आंगन में नहीं बैठते, वे सीखते हैं, गाते हैं, रंगों और आकृतियों से खेलते हैं और शिक्षा की नींव मजबूत हो रही है। इसी के बल पर अब हरियाणा का हर बच्चा कह सकेगा कि मां तुम काम पर जाओ, मैं सीखेने और खेलने क्रेच जा रहा हूं।
मंत्री श्रुति चौधरी ने कहा कि आज इस पावन अवसर पर हम एक बढ़ते कदम, डिजिटल चाइल्ड प्रोग्राम की शुरूआत करने जा रहे हैं। आंगनबाड़ी का नवाचार से मिलन हो रहा है। अब हमारे आंगनबाड़ी केंद्र स्मार्ट क्लास रूम से सुसज्जित होंगे। स्मार्ट टीवी लगेंगे और बच्च रंग-बिरंगे वीडियो में देखेंगे। एक मोबाइल ऐप भी लांच की जा रही है, जिससे हर बच्चे की वृद्धि, पढ़ाई, वजन, टीकाकरण आदि सबकुछ रिकार्ड होगा। अब शिक्षा मनोरंजन से भरपूर होगी और तकनीक से सजी हुई होगी। हर गांव के बच्चे को वह सब मिलेगा, जो शहर के बच्चे को मिलता है। उन्होंने कहा कि जैसे हमारे माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने कहा है कि सच्ची समानता तब आती है, जब तकनीकी अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। आज हरियाणा में हम यह सपना साकार कर रहे हैं। लाडो सखी योजना हर मांग के लिए एक सखी योजना है, जिसका आज से शुभारंभ किया जा रहा है। आज भी कई परिवारों में अगर पहली संतान बेटी हो तो मां पर मानसिक दबाव बढ़ता है। यह अन्याय है। यह स्वीकार नहीं है। उन्होंने कहा कि लाडो सखी, सलाह, देखभाल और सामाजिक सहारा देंगी। सहेली और सहारा बनेगी। अब बेटियों को जन्म देना अपराध नहीं, गौरव बनेगा। आओ हम सब मिलकर कहें कि हर बेटी है अनमोल और हर परिवार का है गौरव।
श्रुति चौधरी ने कहा कि हमारी माताएं, बहनें और बच्चों के माननीय मुख्यमंत्री जी ने दूध उपहार योजना लागू की है। मुख्यमंत्री दूध उपहार योजना से 12 लाख बच्चों और महिलाओं को फोर्टिफाइड दूध हफ्ते में दो दिन दिया जा रहा है। प्रोटीन बार योजना के तहत बच्चों और महिलाओं के लाभार्थियों के लिए आंगनबाड़ी में ऑयरन और सूक्ष्म पोषक तत्वों से भरपूर सप्ताह में दो दिन दिया जा जा रहा है। इंस्टेंट खीर मिक्स, स्वादिष्ट व संतुलित आहार, 8 सूक्ष्म पोषक तत्वों से भरपूर होती है तथा इसे हफ्ते में दो दिन दी जा रही है। मिशन पोषण 2.0 के तहत बेहतर निगरानी, समन्वय और पारदार्शिता से किया जा रहा है। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ एक नारा नहीं, अब हरियाणा की पहचान बन चुका है।
उन्होंने कहा कि आज जब अंबाला की हवालों में झूलों की सरसराहट और गीतों की मिठास गूंज रही है तो आइए हम सब तीज के पावन अवसर पर एक सशक्त हरियाणा का संकल्प लें। शिक्षा बने हर बचपन की पहचान, सम्मान बने हर मां-बेटी का अभिमान, तकनीक हो हर आंगन का साथी, और हरियाणा बने नारी शक्ति का प्रतीक।