केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह द्वारा लोक सभा में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर आयोजित चर्चा में दिए गए उद्बोधन के मुख्य बिंदु
प्रकाशित: 30 Jul 2025, 11:55 AMफायदे के लिए कांग्रेस ने पोटा कानून रद्द किया। दिसंबर 2004 में पोटा कानून खत्म हुआ और 2005 में अयोध्या में रामलला के टेंट पर हमला हुआ। 2006 में मुंबई ट्रेन बम धमाकों में 187 लोगों की मौत हुई। 2006 में लोधा-उधमपुर में हिन्दुओं पर हमला हुआ, जिसमें 34 लोग मारे गए। 2007 में हैदराबाद में 44 लोग और उत्तर प्रदेश के लखनऊ तथा वाराणसी में 13 लोग मारे गए। 2008 में रामपुर सीआरपीएफ कैंप पर हमला हुआ। श्रीनगर में आर्मी के काफिले पर हमला हुआ जिसमें 10 जवान मारे गए। नवम्बर 2008 में मुंबई आतंकी हमले में 246 लोग मारे गए। 2008 में जयपुर के 8 बम धमाकों में 64 लोग, अहमदाबाद के 21 बम धमाकों में 57 लोग मारे गए, दिल्ली के 5 बम धमाको में 22 लोग मारे गए और पुणे की जर्मन बेकरी में 17 लोग मारे गए। 2010 में वाराणसी में बम धमाका हुआ और 2011 में मुंबई में 3 धमाके हुए जिसमें 27 लोग मारे गए। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई होती है। लेकिन सवाल ये है कि 2005 से 2011 के बीच 27 जघन्य हमले हुए और 1000 के करीब लोग मारे गए। आपने क्या किया? राहुल गाँधी यहाँ सदन में आकर बताएं कि उनकी सरकार ने क्या किया था। ये बस पाकिस्तान डोजियर भेजते रहे। ये कहते हैं कि आपके समय में भी हमले हुए। हमारे समय में जो भी आतंकी घटनाएं हुईं वो पाक प्रेरित और कश्मीर केंद्रित हुई हैं। इनके अलावा 2014 से 2025 तक देश में एक भी आतंकी घटना नहीं हुई। मोदी सरकार में कश्मीर की स्थिति आज ऐसी है कि आतंकियों को पाकिस्तान से आना पड़ता है, कश्मीर में आतंकी नहीं होते हैं। मैंने एक दिन सलमान खुर्शीद के बयान को सुना कि उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी बाटला हाउस एनकाउंटर पर रो पड़ीं। अरे रोना था तो शहीद मोहनलाल के लिए रोना था। मगर इन्हें बाटला हाउस के आतंकियों के लिए रोना आता है। इन्हें हमसे प्रश्न करने का कोई अधिकार नहीं है।
श्री शाह ने कहा कि विपक्ष को लगता था कि बायसरन के गुनहगार पाकिस्तान भाग गए, लेकिन सेना ने ठोक दिया। ये मुद्दा उठाना चाहते हैं तो उठाइए, मेरे पास सलमान खुर्शीद का वीडियो है। दिखाना हो तो समय तय कर लीजिए। सैयद सलाहुद्दीन 1993 में भागा, कांग्रेस की सरकार थी, दाऊद इब्राहिम 1986 में भागा, टाइगर मेमन में 1993 भागा, रियाज भटकल 2007 में भागा, इकबाल 2010 में भागा, शादाब बेग 2009 में भागा और हर बार कांग्रेस की सरकार थी। आतंकी जब भी भागे, कांग्रेस की सरकार थी।
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने जम्मू-कश्मीर के विषय पर कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार जनता के प्रति जवाबदेह होती है और हम विपक्ष के हर आरोप का जवाब देंगे। साल 2004-14 में अखंड सोनिया-मनमोहन की सरकार थी। 2004 से 14 में कुल 7217 आतंकी घटनाएं हुई और 2014-25 तक 70 प्रतिशत की कमी के साथ यह संख्या 2150 तक आ गई। 2004 से 2014 के दौरान 1770 लोग मारे गए, जबकि 2014-2025 में यह संख्या 357 रह गई। 2014 से 2024 तक सुरक्षा बलों में हताहतों की संख्या 1060 थी जो भाजपा कार्यकाल में कुल 542 रह गई। भाजपा सरकार में टेररिस्ट्स के मारे जाने में 123% का इजाफा हुआ। अनुच्छेद 370 हटाकर भाजपा सरकार ने टेरर इकोसिस्टम को खत्म कर दिया है। भाजपा ने जीरो टेरर, एरिया डोमिनेशन प्लान बनाया है, मल्टी लेवल डिप्लॉयमेंट किया है, सुरक्षा जेल बनाई हैं, 98 प्रतिशत ट्रायल अब वीडियो पर हो रहे हैं, संचार साधन बसाया है, 702 फोन विक्रेताओं जेल भेजा है और को 2667 अवैध सिमकार्ड खत्म किए हैं। एक जमाना था, कश्मीर में जनाजे में 10-10 हजार लोग रहते थे। लेकिन अब जो आतंकी मारा जाता है, उसे वहीं दफना दिया जाता है। मोदी सरकार में किसी भी आतंकवादी का महिमामंडन करने की अनुमति नहीं है। आतंकियों के समर्थकों को चुन चुन कर नौकरी से निकाला गया है, उनके पासपोर्ट और सरकार कॉन्ट्रैक्ट रद्द कर दिए गए हैं, 75 से अधिक आतंकी समर्थकों को कोर्ट से ऑर्डर लेकर सरकार से बर्खास्त कर दिया गया है, आतंकी समर्थकों से भरी बार काउंसिल को सस्पेंड कर निष्पक्ष चुनाव करवाया है। कई संगठन प्रतिबंधित किए गए, विशेष यूएपीए अदालतें बनाई गईं, 2022 मार्च से लेकर 2025 तक यूएपीए के 367 मामले दर्ज किए गए और 374 कुर्की की गई। परिणाम यह हुआ कि कांग्रेस शासन में एक वर्ष में 2654 घटनाएं संगठित पत्थरबाजी की हुआ करती थी लेकिन 2024 में यह घटनाएं शून्य हो गई हैं। इनके दौर में घाटी में 132 दिन हड़ताल रहती थी, अब घाटी हमेशा खुली रहती है और संगठित हड़ताल 3 साल एक भी नहीं हुई है। कांग्रेस शासन में पत्थरबाजी में हर वर्ष 112 लोगों की मृत्यु होती थी लेकिन 3 वर्ष से एक नागरिक ने अपनी जान नहीं गंवाई है। यूपीए सरकार में हर वर्ष 6235 लोग पत्थरबाजी में घायल होते थे लेकिन आज यह संख्या भी शून्य हो गई है।
श्री शाह ने कहा कि एक समय में हुर्रियत के नेताओं को वीआईपी ट्रीटमेंट मिलता था लेकिन भाजपा सरकार ने हुर्रियत के हर कॉम्पोनेंट को प्रतिबंधित कर जेल की सलाखों के पीछे डाल दिया है। हम हुर्रियत से कोई बात नहीं करते। ये टेरर आउटफिट हैं। हम बात करेंगे तो कश्मीर के युवाओं से बात करेंगे। पहले चुनाव के दौरान डर का माहौल होता था, मगर अब पंचायत चुनाव में 98.3 प्रतिशत मतदान हुआ। कांग्रेस के बंद-बहिष्कार का समय खत्म हो गया। पहले अलगाववादी बात करना चाहते थे, मगर अब नहीं कर सकते हैं। 2019 के बाद मोदी सरकार ने कई आतंकी संगठनों पर प्रतिबंध लगाया। केंद्र सरकार ने टीआरएफ (TRF), पीपल्स एंटी फासिस्ट फ्रंट (PAFF), तहरीक उल मुजाहिद्दीन (TeM), जमात उल मुजाहिद्दीन - बांगलादेश हिंदुस्तान (JMB) जम्मू-कश्मीर गजनवी फ़ोर्स (JKGF), खालिस्तान टाइगर फ़ोर्स (KTF), हिज्ब उल तहरीन (HuT), जमात ए इस्लामी, जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF), जम्मू-कश्मीर डेमोक्रेटिक फ्रीडम पार्टी (JKDFP), जम्मू-कश्मीर मुस्लिम लीग (JKML), तहरीक ए हिर्रिय्त (TeH), मुस्लिम कोंफ्रेंस (MC), जम्मू-कश्मीर नेशनल फ्रंट (JKNF), जम्मू-कश्मीर पीपल्स फ्रीडम लीग (JKPFL), जम्मू-कश्मीर पीपल्स लीग (JKPL), जम्मू-कश्मीर इताहुल मुसलमीन (JKIM), आवामी एक्शन कमेटी (AAC), सिख फॉर जस्टिस (SFJ) और पीएफआई (PFI) जैसे आतंकी संगठनों को प्रतिबंधित किया है।
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि गोगोई जी पाकिस्तान तो कई बार गए हैं लेकिन शायद कभी सीमा के रास्ते नहीं गए। बर्फ में और -43 डिग्री ठंड में जवान तैनात हैं। वहां से कोई आएगा तो मारा जाएगा। कांग्रेस को सीमा की कठिनाइयां नहीं मालूम हैं। घुसपैठ की बात कर रहे कांग्रेस नेताओं के समय में घुसपैठिए सीधे आते थे, उन्हें वीजा दिया जाता था। पोटा रद्द करने वाले को माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की आतंक रोधी नीति पसंद नहीं आएगी। मोदी सरकार आतंकवाद के खिलाफ हमारी जीरो टोलेरेंस की नीति है और भारत विजयी होकर रहेंगे। अंत में श्री अमित शाह ने सेना और सुरक्षाबलों को उनके पराक्रम के लिए धन्यवाद और आभार व्यक्त किया।
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